Saturday, 9 July 2016

बच्चे आजकल बूढ़े पैदा होते है

बच्चे आजकल बूढ़े पैदा होते है 
टूटे हुए दाँत , दूसरों पर मदार 
झुकी गर्दने , धिमिसि चाल ... 
आखों पर चष्मा ,
किताब स्कुल की पढ़ते वक्त
आजकल , खेलना ठुकराते है 

पीठ पर बोजा होता है भारी 
सपनें कुछ अपने  
कुछ अपनो के
अौर काफी जिम्मेदारी ... 
उसमे होती है समाई ... 

मैदान पर बूढ़े ही दौड़ते नजर आते है अब ... 
खेलते है , हस्ते है जोरो से 
निम का पेड़ स्टंप बनता है... 
जब बुढे क्रिकेट खेलते है !
वही निम के निचे 
जो कभी ताश खेलते वक्त 
छाव बना करता था उनके ख़ातिर ... 
जो आते है कुछ चुनिंदा बच्चे 
मैदान पर ,
बस जितने के लिए आते है 
लड़कर एकदूसरोंसे 
काफी कुछ हार जाते है 

बचपन और बुढ़ापा 
एकसा होता है सुना था ... 
पर आजकल 
बच्चे बूढ़े पैदा होते है 
और बूढ़े काफी बच्चे बन गए है ... 


P.S. - 
Javalpas 2 varsha hi kavita manat trass det hoti ... ajun purnatvala nahi ali ... karan mich samadhani nahiye ... tumhala hyavar kahi bolaycha aslyas ... salla deyche aslyas .... jarur dya ! Happy reading 


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